मिथिला-मैथिली आन्दोलन : इतिहास आओर दशा-दिशा — डॉ. रंगनाथ दिवाकर 2

मिथिला-मैथिली आन्दोलन : इतिहास आओर दशा-दिशा
— डॉ. रंगनाथ दिवाकर
अपन भृंगदूत काव्यमे भगवान् श्रीकृष्णक मुखारविन्दसँ सत्यभामाकेँ मिथिलाक विषयमे कवि गंगानन्द कहओने छथि—
यत्र विज्ञ वदनेषु दर्पिता नृत्यति प्रतिगृहं सरस्वती
अर्थात् मिथिलाक प्रत्येक घरमे सरस्वती सोल्लास नृत्य करैत छथि। जाहि ठाम घर-घरमे सरस्वतीक वास हो, जतऽ केर आम लोक व्यवहार धर्मक मानदंड मानल जाइत हो- धर्मस्य निर्णयो ज्ञेयः मिथिला व्यवहारतः; जतए याज्ञवल्क्य, गार्गी, मैत्रेयी, कालिदास, मंडन, वाचस्पति, विद्यापति, अयाची, शंकर, बच्चा झा प्रभृति मनीषी उद्भूत भेल होथि ओहि ठाम मिथिला-मैथिलीक लेल आन्दोलनपर बात करब मोनकेँ उद्विग्न करैत अछि। आखिर ई की परिवर्तन भेल जे कहियो राष्ट्रीय मेधाक प्रतिनिधित्व करएवला क्षेत्रकेँ अपन अस्मिताक रक्षार्थ आन्दोलन करबाक लेल विवश होमऽ पड़ल! एकर बहुत रास कारण अछि जाहिमे एक महत्त्वपूर्ण कारण अंग्रेज सभक कृष्ण भारतीय नीति सेहो अछि। अंग्रेज सभक विशेष रूपसँ मैकालेक नीति आम भारतीयमे अपन भाषा, धर्म-संस्कृति, वेद-पुराण, साहित्य-दर्शन, ज्ञान-विज्ञान, इतिहास-परम्परा आदिक प्रति हीन भावना आ पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान, साहित्य-दर्शन, भाषा आदिकेँ श्रेष्ठ मानबाक प्रवृत्ति विकसित करबामे सफल भेल। मैकालेक मिथ्या दम्भ विषयक अवधारणा छल जे सम्पूर्ण भारतीय ज्ञान-विज्ञान, साहित्य-दर्शन आ प्रज्ञा यूरोपक कोनो पुस्तकालयक एक अलमीराक एक रैकमे राखल पोथीक परतर नहि कऽ सकैछ, भारतीयमे ने इतिहास बोध अछि, ने ज्ञान-विज्ञान केर समझ। कोनो भारतीय भाषा ने शिक्षाक माध्यम भऽ सकैछ आ ने सम्पर्क भाषा, एहि लेल मात्र अंग्रेजीए सक्षम अछि। शिक्षा संबंधी ओ निस्पंदन सिद्धान्त (Theory of Filteration)केँ मानलनि जे हमर निधि हमरा एकर अनुमति नहि दैत अछि जे सभकेँ पढ़ा सकी तेँ मात्र संभ्रान्त वर्गक नेनाकेँ पढ़ाओल जाएत आ निस्पंदन केर सिद्धान्तानुसार निम्नवर्गीय बच्चा ओकरा सभक संसर्गमे स्वयं पढ़ि लेत। वाह रे अंग्रेजी सोच! यथार्थमे ओ अंग्रेजी शासनकेँ सुचारु रूपसँ चलएबाक लेल एहन भारतीय सभकेँ तैयार करबाक उद्योगमे छल जे रूप-रंगमे तऽ भारतीय हो मुदा सोच-विचार आ भावना-कल्पनासँ अंग्रेज हो। अपन प्रयासमे ओ सफल भेल आ एहन असंख्य कृष्ण अंग्रेज तैयार भेल जे भारतीय रहितो अपन नीको चीजकेँ हेय आ अंग्रेज सभक निकृष्टो वस्तुकेँ श्रेष्ठ मानैत रहल। मैकाले केर यैह विषबीज कालान्तरमे छतनार गाछ बनि गेल। भारतवर्षमे अखनो ओकर बहुत रास सन्तति ओकरा अपन पुरखा मानि प्रेतशिलापर बैसा पिण्डदान दैत छथि। भारत आ इंडियाक सोचमे एवं मातृभाषा आ अंग्रेजीक स्थितिमे ई द्वन्द्व अखनो देखल जा सकैछ। मिथिलाक सन्दर्भमे तऽ ई आर प्रासंगिक अछि। आइ कतेक उच्च मध्यवर्गीय लोक अपन परिवारमे धिया-पुता, पौत्र-पौत्री, नाति-नतिनी संग मैथिली बजैत छथि? जँ छातीपर हाथ राखि एकर गणना कएल जाय वा कोनो गाममे कोनो विभवशाली लोक ओतए उपनयन, बियाह, श्राद्ध आदिमे विभिन्न ठामसँ जुटल लोक सभक नेनाक समूहमे जा ओकरा सभक बातचीत सुनल जाय, जे बेसी हिन्दी-अंग्रेजीमे होइत अछि, तखन ओहि मैकाले केर अवधारणाक अपरिमित शक्ति आ युगान्तकारी प्रभाव केर एहसास होयत! सभ घरक एकहि लेखा! अपन भाषा-संस्कृति आ देश-धर्मकेँ हीन मानबाक आत्महीनताकेँ तिलांजलि देबए पड़त। ई साँच जे जहिना आत्महीनता अनिष्टकारी अछि तहिना आत्ममुग्धता सेहो अमंगलकारी अछि तथापि एहि प्रवृत्तिसँ मुक्त होएब उचित जे अपन भाषा आ संस्कृतिमे नीको चीजकेँ तखने स्वीकार करब जखन कोनो विलियम जोन्स, कोनो गेटे, कोनो मैक्समूलर, कोनो राबर्ट वा विलियम सन आंग्ल नामधारी ओकरा श्रेष्ठ कहत! ई सत्य जे भारतीय वाङ्मयमे सभटा सर्वस्वीकार्य आ उचिते बात नहि अछि। मुदा इहो सत्य जे एहन मात्र भारतीय वाङ्मय संग नहि अछि। सभटा प्राचीन सभ्यता संग एहन बात छैक। अनर्गल कथादि केर प्राचुर्य सभ सभ्यताक प्राचीन ग्रंथमे छैक। प्रत्येक युगक यथार्थ भिन्न होइत छैक। ओहि समय जे उचित रहए से अखनो प्रासंगिक हो, ई आवश्यक नहि। अपन समुचित दृष्टिसँ, नीर-क्षीर विवेकसँ एकर निर्धारण करी जे श्रेय की आ त्याज्य की। एहि समुचित दृष्टि आ विवेक लेल अपन भाषा-संस्कृतिक प्रति आदरभाव आवश्यक। एहि आदरभावसँ विमुख भेल जन-जनमे चेतना व जागृति आनबाक हेतु जड़िसँ जुड़ल आन्दोलन केर आवश्यकता सभ दिन रहैत अछि। मिथिलामे सेहो एहि विन्दुपर आन्दोलन वा जागृतिक प्रयास केर इतिहास रहल अछि।
शिमलामे छुट्टी मना रहल भारतवर्षक भाइसराय कर्जन 19 जुलाई 1905केँ ओतहिसँ बंगाल विभाजन केर घोषणा कएलनि। घोषणा होइते जेना बिढ़नीक खोँतामे ढेला पड़ि गेल हो। भारी विरोध शुरू भेल। भाषा आ धर्मक नामपर पूर्व बंग आ असम बनल छल। सभ ठाम बंग-भंग केर प्रबल विरोध भेल मुदा बंगालमे ई अत्यन्त उग्र छल। अग्निपुत्र सभक उदय भेल। उग्र राष्ट्रीय भावनाक संचार भेल। प्रबल प्रतिरोधक प्रभाव रहल जे 12 दिसम्बर 1911केँ दिल्लीमे आयोजित दरबारमे घोषणा भेल जे बंग-भंग समाप्त कएल जा रहल अछि। 1912मे भारतवर्षक राजधानी कलकत्तासँ दिल्ली आबि गेल। एहि वर्ष सेहो पृथक् राज्यक माँग भेल आ 22 मार्च 1912केँ बिहारक गठन भेल।
मिथिलेश रमेश्वर सिंह मिथिलाक्षर लिपि केर स्थानपर देवनागरीक गागरीमे डुबकी लगा भयंकर गलती कएने छलाह। राज-काजक भाषा रूपमे फारसी-अंग्रेजीक स्थानपर हिन्दीकेँ स्थान देलनि। 1910मे ओ मैथिल महासभाक स्थापना कएलनि आ 1921मे मिथिला राज्यक माँग कएलनि (मिथिलेश कुमार झा : Language Politics and Public Sphere in North India : Making of the Maithili Movement, p 156)। हुनकर एहि काजकेँ मिथिलाक्षर लिपिकेँ त्याग करबाक भूल केर प्रायश्चित कहि सकैत छी। बादमे मैथिल महासभाक 35म राजनगर सम्मेलन (1946), 37म दरभंगा सम्मेलन (1948) आ 38म मधुबनी सम्मेलन (1949)मे मिथिलेश सर कामेश्वर सिंह अपन अध्यक्षीय उद्बोधनमे मिथिला राज्यक प्रश्न उठबैत रहलाह, प्रस्ताव पारित होइत रहल मुदा सरकार कानमे तूर-तेल देने सुतले रहल।
1936मे जखन उड़ीसाकेँ अलग राज्यक दर्जा देल गेल तखन फेर मिथिला राज्यक कर्ता-धर्ता सक्रिय भेलाह मुदा कोनो सार्थक सुरि-सारि संभव नहि भेल। 1948मे जस्टिस एस के धर केर चारि सदस्यीय समिति भाषाक आधारपर राज्यक गठन केर विरोध कएलक। एकर बाद एहि समिति केर सिफारिश सभक समीक्षा हेतु गठित जेवीपी (जवाहर लाल नेहरू, वल्लभ भाई पटेल आ पट्टभि सीतारमैय्या) समिति सेहो भाषाक नामपर राज्य निर्माणक विरोध कएलक। एहि निर्णय केर भारी विरोध भेल। तेलुगु मनीषी पोट्टी श्रीरामुलु (16 मार्च 1901-15 दिसम्बर 1952) तेलुगुभाषी राज्यक लेल 19 अक्टूबर 1952सँ आमरण अनशन शुरू कएलनि। 56 दिनक अनशन बाद ओ देहत्याग कएलनि। हुनका अमरजीवी कहल गेल। भारतवर्षक आजादीक लेल लाहौर सेन्ट्रल जेलमे यतीन्द्रनाथ दास 63 दिनक अनशन करैत 13 सितम्बर1929केँ अपन सुन्दर काया भारतमाताकेँ अर्पित कएने छलाह। श्रीरामुलुक देहत्यागसँ यतीन्द्रनाथ केर आत्मोत्सर्ग लोककेँ मोन पड़ल। यज्ञाग्निमे जेना घी-चन्दन-गुग्गुलादि केर आहुति पड़ि गेल हो! सम्पूर्ण क्षेत्र दलमलित भेल। कहि सकैत छी जे उग्र आन्दोलनकेँ शान्त करबा लेल तेलुगु भाषाक नामपर श्रीरामुलुक लहासपर 1 अक्टूबर 1953केँ तेलुगुभाषी राज्य आन्ध्रप्रदेशक उदय भेल। बादमे एहिसँ 2 जून 2014केँ तेलांगना राज्य अलग भेल। भाषाक नामपर राज्य गठन केर माँग जोर पकड़ि रहल छल। 19 दिसम्बर 1953केँ राज्य पुनर्गठन आयोग बनल। जस्टिस सैय्यद फजल अली, हृदयनाथ कुंजरू आ सरदार के एम पणिक्कर एकर सदस्य भेलाह। 1955मे समर्पित अपन प्रतिवेदनमे समिति कहलक जे 1951 केर जनगणनाक आधारपर भारतमे 844 भाषा अछि मुदा 91 प्रतिशत लोक मात्र 14 भाषाक उपयोग करैत छथि। 1956मे एहि समितिक अनुशंसा स्वीकृत भेल जाहि आधारपर 14 राज्य आ 6 केन्द्र शासित प्रदेश बनल। मैथिलीकेँ हिन्दी संग गानल गेल आ मिथिला पृथक् राज्य नहि बनि बिहारमे रहबाक लेल विवश भेल। यद्यपि 1952मे डाॅ. लक्ष्मण झा पृथक् मिथिला राज्यक लेल आन्दोलन शुरू कऽ देने छलाह। बाबू जानकी नन्दन सिंह सेहो एहि लेल आवाज बुलन्द कएलनि। अखिल भारतीय मैथिल महासभा राज्य पुनर्गठन आयोगकेँ मिथिला राज्यक लेल 1953मे स्मारपत्र देलक। एहि वर्ष अखिल भारतीय मैथिली साहित्य परिषद् सेहो पृथक् मिथिला राज्य निर्माण हेतु माँगपत्र देलक। जानकी बाबू 1954मे राज्य पुनर्गठन आयोगकेँ स्मारपत्र देलनि। 1954मे कांग्रेस केर कल्याणी (कलकत्ता) अधिवेशनमे एहि माँगकेँ तीक्ष्णतासँ उठएबाक लेल 65 आन्दोलनकारी संग कलकत्ता विदा भेलाह। आसनसोलमे सभकेँ 22 जनवरी 1954केँ गिरफ्तार कऽ लेल गेल। अधिवेशनमे नहि जएबाक शर्त्तपर न्यायालय द्वारा छोड़ल गेल। जानकी बाबू किछु गोटे संग तखनो कलकत्ता पहुँचि गेलाह। कलकत्तामे 23 जनवरी 1954केँ नागेश्वर मिश्रजीक अध्यक्षतामे मिथिला राज्यक लेल बैसार भेल। फेर 26 जनवरी 1954केँ गिरीश पार्क, कलकत्तामे जानकी बाबूक अध्यक्षतामे पैघ सभा भेल जाहिमे मिथिला राज्यक माँग दृढ़तापूर्वक उठाओल गेल। एहि कारणेँ जानकी बाबूपर कांग्रेसमे अनुशासनात्मक कार्रवाही
भेल आ 1956मे बाबू जानकीनन्दन सिंह कांग्रेससँ हटि गेलाह।
डाॅ. लक्ष्मण झा अपन अतुलित मेधाक सारस्वत उपयोग करैत मिथिलाक समग्र स्वरूप स्थिर करबा लेल Mithila and Magadh (शोध-प्रबंध, 1948), Mithila : A Union Republic (1951), Mithila in India (1953), Mithila : A Sovereign Republic (1954), Mithila will Rise (1955),The Voters in Mithila (1956) आदि पोथी सभक रचना कएलनि। हुनक मिथिला मण्डल संस्था सक्रिय रहल मुदा सरकार सीरक तानने सुतले रहल। सरकारक दृष्टिकोणसँ व्यथित डाॅ. लक्ष्मण झा मिथिला-मैथिलीक स्वतंत्र स्वरूप आ मिथिला राज्यक औचित्यपूर्ण आवश्यकता दर्शावैत प्रधानमंत्रीकेँ 1956मे अपन मिथिला संबंधी किछु रचना आओर आन दस्तावेज सहित मिथिला राज्य लेल माँगपत्र देलनि।
मिथिलाक सन्दर्भमे सरकार सरिपहुँ सुतले रहल जखन कि गुजराती आ मराठी विवादक बाद 1 मई 1960केँ बम्बईकेँ महाराष्ट्र आ गुजरातमे बाँटल गेल, 1 दिसम्बर 1963केँ नागा आन्दोलन केर बाद असमसँ नागालैंड बनल, 1 नवम्बर 1966केँ पंजाबी आ हिन्दीक नामपर पंजाबसँ हरियाणा पृथक् कएल गेल। 25 जनवरी 1971केँ हिमाचल पूर्ण राज्य बनल। 21 जनवरी 1972केँ केन्द्र शासित मणिपुर आ त्रिपुराकेँ पूर्ण राज्यक दर्जा देल गेल। सिक्किम 26 अप्रैल 1975केँ बनल, 20 फरवरी 1987केँ अरुणाचल/ मिजोरम आ 30 मई 1987केँ गोवा बनल। 1 नवम्बर 2000केँ मध्यप्रदेशसँ छत्तीसगढ (26म राज्य), एहि वर्ष 9 नवम्बरकेँ उत्तरप्रदेशसँ उत्तराखंड (27म राज्य) आ 15 नवम्बरकेँ बिहारसँ झारखंड (28म राज्य) बनल। 2014मे आन्ध्रप्रदेशसँ तेलांगना (29म राज्य) बनल। 5 अगस्त 2019केँ जम्मू-कश्मीरसँ धारा 370/ 35ए हटएलाक बाद आब भारतवर्षमे 28 राज्य बाँचल अछि। सत्य अछि जे दवाबपर किछु राज्यक नाम सेहो परिवर्तित भेल जेना मैसूर कर्णाटक, मद्रास तमिलनाडु, उत्तरांचल उत्तराखंड, उड़ीसा ओडिशा आ पांडिचेरी पुडुचेरी भेल मुदा मिथिलाक अस्तित्व ओहिना रहल। एहि वर्णनसँ एक बात धरि स्पष्ट अछि जे सरकार राज्य निर्माणमे आन्दोलनेक भाषा बुझैत अछि। मिथिला राज्यक लेल आन्दोलन तऽ चलिए रहल छल मुदा सरकार एहिपर कोनो गंभीर विचार नहि कएलक।
मिथिला-मैथिल-मैथिलीक विकास हेतु प्रतिबद्ध अनेक संस्था बनल। पुरान संस्था सभमे मैथिल शिक्षित समाज, कलकत्ता; मिथिला विकास परिषद्, कलकत्ता; मैथिल सम्मेलन, पटना; सुबोधिनी सभा, पटना; मैथिल युवक संघ (अड़ाइडंगा आ पूर्णियाँ), विभिन्न मैथिल सभा (आगरा, अजमेर, अलवर, जबलपुर, हाथरस, इटावा, झाँसी, जैत मथुरा), मैथिल ब्राह्मण सेवा समिति, हरियाणा; अखिल भारतीय मैथिल महासभा(1949-50), प्रवासी मैथिल ब्राह्मण सभक संघ, वैदेही समिति, चेतना समिति, संकल्प लोक, विद्यापति सेवा संस्थान प्रभृति संस्था सभ प्रमुख अछि। मिथिला-मैथिलीक लेल जागृतिक प्रचार-प्रसारमे संस्था सभक अवदान महत्त्वपूर्ण अछि।
मैथिली पत्र-पत्रिका सभक अभ्युदय मिथिलासँ बाहरे शुरू भेल। मैथिल हित साधन 1905मे मासिक रूपमे मधुसूदन झाजी (जयपुर) आ रामभद्र ओझाजी (अलवर स्टेटक मुख्य न्यायाधीश) केर सत्प्रयाससँ जयपुरसँ प्रकाशित होएब शुरू भेल। म.म. मुरलीधर झा, पं. दीनानाथ मिश्र, पं. कुशेश्वर कुमर आदि महानुभाव 1905मे काशीसँ मिथिला मोद शुरू कएलनि। 1908मे दरभंगासँ मिथिला मिहिर शुरू भेल। 1935-36मे आ. सुमनजीक सम्पादनमे प्रकाशित एकर मिथिलांक अखनो मिथिलाक धरोहर मानल जाइत अछि। 17 जुलाई 1947सँ मार्च 1954 केर मिथिला मिहिरक अनेक अंकमे मिथिला राज्यक माँगसँ संबंधित बहुत रास स्तरीय आलेख प्रकाशित भेल छल। ब्रजस्थ प्रवासी मैथिल पं. रामचन्द्र मिश्र 1920मे मथुरासँ मिथिला प्रभा शुरू कएलनि। 1925मे उदित नारायण दासजी आ नन्दकिशोर दासजीक संयुक्त सम्पादनमे लहेरियासरायसँ श्री मैथिली नामक पत्र केर प्रकाशन शुरू भेल जे उदितजीक खराब स्वास्थ्यक कारणेँ अल्पजीवी भेल। 1929मे विद्यापति प्रेस, लहेरियासरायसँ कुशेश्वर कुमरजी आ भोलालाल दासजीक सम्पादनमे मिथिला मासिक पत्र शुरू भेल। एहि समस्त पत्र-पत्रिकादिक मिथिला-मैथिलीक विकासमे महत्त्वपूर्ण अवदान अछि। मैथिलीमे अनेक पत्र-पत्रिकादि शुरू भेल मुदा दुर्भाग्य जे ई सभ अल्पजीवी होइत रहल। दैनिक पत्र स्वदेश आ मिथिला आवाजकेँ अकाल काल-कवलित होएब हम मैथिल सभक भाषाप्रेमपर प्रश्नचिह्न तऽ अवश्य लगबैत अछि। सुखद जे मिथिला आवाज पाक्षिक रूपमे फेर शुरू भेल तथा मैथिली दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश लगातार अपन 262म अंक (17 सित. 2022) प्रकाशित कऽ चुकल अछि। एकर निरन्तरता बरकरार रहए एहि लेल तन-मन-धनसँ सहयोग करब आ एकरा डेबिकेँ, जोगाकेँ राखब प्रत्येक मैथिलक पुनीत कर्त्तव्य थिक। आमजन केर ई भाव मिथिला-मैथिलीक यज्ञमे समिधा होएत।
एहिना पठन-पाठनमे मैथिली सेहो मिथिलासँ बाहरे शुरू भेल। राजा कृत्यानंद सिंह, राजा कालिकानंद सिंह, कुमार गंगानंद सिंह, बाबू गंगापति सिंह, ब्रजमोहन ठाकुरजी, विद्यानंद ठाकुरजी, राजा टंकनाथ चौधरी प्रभृति दानी-अभियानी सभक सत्प्रयाससँ 1914मे कलकत्ता विश्वविद्यालय केर भविष्यद्रष्टा उप कुलपति सर आशुतोष मुखोपाध्यायक समय मैथिली चेयर स्थापित भेल। फेर 1919मे मैथिलीमे स्नातकोत्तर केर पढ़ाई शुरू भेल। पं. बाबूजी मिश्र, पं. खुद्दी झा, डाॅ. सुधाकर झा शास्त्री, बाबू गंगापति सिंह आदिकेँ मैथिलीक आरम्भिक प्रोफेसर होएबाक गौरव भेटल। 1972 केर बाद ई पढ़ौनी बन्द भऽ गेल। पुनः पढ़ौनी शुरू करबाक प्रयास चलि रहल अछि। पटना विश्वविद्यालयमे 1948सँ मातृभाषा रूपमे मैथिलीक पढ़ाई शुरू भेल। मैथिली पढ़निहार छात्र सभक अभाव रहैत छल तखन अखिल भारतीय मैथिली साहित्य परिषद्, दरभंगाक प्रचार विभागक मंत्री अभिभावकगणसँ एक निवेदन कएलनि। पत्र रूपमे प्रचारित एहि निवेदनमे अनुरोध कएल गेल छल जे मातृभाषाक निरादर माताक निरादर थिक। एहन लोक देशभक्तिक दावी नहि कऽ सकैत छथि तेँ छात्र मातृभाषा अवश्य पढ़थि ताहि लेल अपने सब सेहो यत्न करी। मातृभाषा पत्रमे मैथिली पढ़बाक लेल प्रोत्साहन देल जाय। एकर कचोट अखनो अछि जे एहि निवेदनकेँ निर्गत भेना सात दशकसँ बेसी भेल मुदा स्थिति आइयो लगभग ओहिना अछि। मेधावी छात्र तऽ ओम्हर ताकबो नहि करैत छथि। एकर कारण मानसिकता आ मैथिलीकेँ अर्थकरी विद्या नहि बनि सकब थिक। बिहारमे जे वित्तरहित व्याख्याताक अवधारणा बनि गेल छल से मेधाक सत्यानाश कएलक। आब एम्हर नियमित नियुक्ति शुरू भेल जे सुखद संकेत अछि। मैथिली शिक्षक केर बहालीसँ स्थितिमे गुणात्मक सुधार आबि सकत। एहि लेल प्रयास चलि रहल अछि। मिथिला-मैथिली आन्दोलन केर एक प्रमुख स्वर पाठशालामे मैथिली अछि। श्री दिलीप कुमार झा आदि शिक्षकगण एहि दिशामे बेस सक्रिय छथि।
जन सेवा आयोगक परीक्षामे ऐच्छिक विषय रूपमे मैथिलीक स्वीकृतिक घोषणा 1957 केर आम निर्वाचनसँ पूर्व भेल छल। एकर प्रस्तावक पं. राधानन्दन झाक अभिनन्दन केर ओरिआन अखिल भारतीय मैथिली साहित्य परिषद् केर प्रधान मंत्री रूपमे सुप्रसिद्ध कवि पं. सुरेन्द्र झा सुमनजी सीएम महाविद्यालय, दरभंगामे कएलनि। मैथिली छात्र परिषद् एमएल एकेडमी, लहेरियासरायमे पं. नागेश्वर मिश्र केर अध्यक्षता आ पं. लक्ष्मण झा द्वारा उद्घाटित समारोहमे सेहो राधानन्दनजीक अभिनन्दन कएलक। बिहार लोक सेवा आयोगक अध्यक्ष रूपमे डाॅ. अमरनाथ झाक मैथिलीकेँ ऐच्छिक विषय रूपमे मान्यता दिएबाक दिशामे अप्रतिम अवदान अछि। बादमे मैथिलीकेँ ऐच्छिक विषय सूचीसँ निष्कासित सेहो कएल गेल मुदा ई मिथिला-मैथिली आन्दोलन केर सफलते थिक जे आइ मैथिली बिहार लोक सेवा आयोग एवं संघ लोक सेवा आयोगमे ऐच्छिक विषय रूपमे सम्मिलित अछि आ प्रत्येक वर्ष मैथिली ऐच्छिक विषय राखि बहुत रास विद्यार्थी सरकारी पदाधिकारी बनैत छथि। एहन सफल प्रतिभागी जँ अपन-अपन कार्यालयमे मैथिलीक बेसीसँ बेसी उपयोग करथि आ कोनो मैथिलसँ निधोख मैथिलीएमे गप्प करथि तखन मैथिलीक स्वाभाविक विकास आसान भऽ जाएत। मैथिलीक प्रति यैह हुनकर सरियत! एहिसँ मिथिला-मैथिली आन्दोलनकेँ अनायासे तीव्र गति भेटि जेतैक। ओना अखन बिहार लोक सेवा आयोग ऐच्छिक विषय सूचीसँ भाषा सभकेँ हटा देलक अछि जेकर पुरजोर विरोध शुरू भेल अछि।
प्रो. धर्मेन्द्र कुमर अपन गाम पुतइमे दि. 29, 30 आ 31 मई 1984केँ वृहत् रूपमे अखिल भारतीय मिथिला जन सम्मेलनक सफल आयोजन कएने छलाह। एहिमे जननेता भोगेन्द्र झाजी, रमाकान्त झाजी, किरणजी, मणिपद्मजी, प्रो. मायानंद मिश्र, डाॅ. सुरेश्वर झा प्रभृति नरश्रेष्ठ सभक उपस्थिति छल। एहि अभूतपूर्व समारोहक प्रथम दिनक सम्मेलन केर अध्यक्षता डाॅ. सुरेश्वर झा कएने छलाह आ मंच संचालन प्रो. मायानंद मिश्र कएने रहथि। दोसर दिन डाॅ. काञ्चीनाथ झा ‘किरण’जीक अध्यक्षतामे चलि रहल सम्मेलनमे डाॅ. सुरेश्वर झा पृथक् मिथिला राज्यक प्रस्ताव रखलनि जे सर्वसम्मतिसँ पारित भेल। एहि त्रिदिवसीय मिथिला जन सम्मेलनक सफलता अपूर्व रहल। प्रो. धर्मेन्द्र कुमर आ कालीकान्त झाजी सहित पुतइ ग्रामवासी सरिपहुँ बधाई केर पात्र छथि।
1992सँ अन्तरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् मिथिला राज्य आन्दोलनमे सक्रिय रूपसँ लागल अछि। डाॅ. धनाकर ठाकुर, कमलाकान्त झाजी, डाॅ. भुवनेश्वर प्रसाद गुरमैता आ के एन झाजीक कमानमे ई संस्था अपन सक्रियता देखओने छल। मिथिला राज्य संघर्ष समितिक गठन 1994मे भेल। मधुबनीमे आयोजित अन्तरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् केर दोसर सम्मेलन 1996मे डाॅ. जयकान्त मिश्रकेँ अध्यक्ष बनाओल गेल। चुनचुन मिश्रजी, प्रो. उदयशंकर मिश्र, नगीना प्रसाद महतोजी, प्रमोद कुमार झाजी, सत्य नारायण महतोजी, डाॅ. धनाकर ठाकुर प्रभृति उत्साही अभियानी सभक नेतृत्वमे रहल ई संस्था अखनो मिथिला-मैथिली एवं मिथिला राज्यक लेल सक्रिय रूपसँ लागल अछि। जनसम्पर्क आ प्रचार-प्रसारसँ आन्दोलनकेँ धारदार कएल जा रहल अछि। कतेको वर्षसँ अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति संसद केर सत्रारम्भक प्रथम दिन मिथिला राज्यक माँग दोहराबैत अछि। सम्प्रति एकर अध्यक्ष वैजूजी छथि। 1996मे मिथिला राज्यक लेल जनसम्पर्क आ पदयात्राक मध्य मिथिलांचल विकास कांग्रेस मिथिलाक लेल स्वायत्त विकास परिषद केर गठनक माँग कएलक। 2013मे मिथिला राज्य निर्माण समितिक गठन भेल। योगी जनक कुशवाहाजी (मधेपुरा) अध्यक्ष आ महेन्द्र मिश्रजी महासचिव भेलाह। अन्तरराष्ट्रीय मैथिली परिषदसँ अनुप्राणित आदर्श मिथिला पार्टीक अध्यक्ष श्री सुधीरनाथ मिश्र (अररिया) आओर महासचिव श्री मनोज कुमार यादव (वैशाली) छथि। सभक एकमात्र लक्ष्य मिथिलाक कल्याण आ मिथिला राज्यक निर्माण अछि। 14 जनवरी 2013केँ दिल्लीमे गठित मिथिला राज्य निर्माण सेना विभिन्न कार्यक्रम आ पुनर्जागरण यात्रासँ अपन सक्रिय उपस्थिति दर्शा रहल अछि। भले एकर मूल वाक्य ‘ले जान की दे जान’सँ सभक सहमति नहि रहल हो मुदा एकर कार्यक्रमसँ सभक सहमति निश्चित रहैत अछि। श्री रंगनाथ ठाकुर, दीपकजी, राजेश कुमार झाजी, नुनूजी प्रभृति उत्साही अभियानी सभक नेतृत्वमे संस्था अपन नाम सार्थक करैत अछि। 24 अप्रैल 2022केँ महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह मेमो. कॉलेजमे मिथिला राज्य विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी केर सफल आयोजन भेल। अखिल भारतीय मिथिला संघ, नयी दिल्ली 24 दिसम्बर 2017केँ भव्य रूपसँ अपन स्वर्ण जयन्ती समारोह मनओलक अछि। संस्थाक राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विजय चन्द्र झा बेस सक्रिय छथि। ‘तीरभुक्ति’क प्रकाशन सेहो होइत अछि।
5 अगस्त 2000केँ पं. ताराकान्त झा मिथिला राज्य अभियान शुरू कएलनि। स्वयं संरक्षक छलाह आओर सुप्रसिद्ध चिकित्सक डाॅ. मोहन मिश्र अध्यक्ष। बादमे डाॅ. सुरेश्वर झा कार्यकारी अध्यक्ष आ प्रो. चन्द्रकान्त मिश्र सचिव केर दायित्व वहन कएलनि।
4 अगस्त 2004केँ पं. ताराकान्त झा एक प्रेसवार्तामे पृथक् मिथिला राज्यक लेल आन्दोलनक घोषणा कएलनि। एहि कारणेँ भाजपासँ निष्कासित भेलाह। 15सँ 23 दिसम्बर 2007 धरि ताराकान्त बाबू मिथिला राज्यक अलख जगएबाक लेल बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार, पूर्णियाँ, किशनगंज, अररिया, फारविशगंज, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल आदि क्षेत्रक भ्रमण कएलनि।
2015मे कीर्त्तिवर्द्धन भागवत झा आजाद संसदमे एहि मुद्दाकेँ उठओलनि आ मिथिला राज्यक माँग कएलनि। अखिल भारतीय मिथिला संघ, दिल्ली अध्यक्ष मान. पूर्व सांसद राजेन्द्र प्रसाद यादव एवं महासचिव विजय चन्द्र झाक नेतृत्वमे एहि आन्दोलनकेँ जगओने छथि। Youth of Mithila (अन्तरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् केर दिल्ली इकाई) आ Voice of Mithilaक भवेश नंदन आ आनन्द कुमार झा जमीनी कार्यकर्ता सभमे जोश दिया रहल छथि। दिल्लीक जंतर-मंतरपर राजीव कुमार झा (कवि एकान्त)क चारि दिनक अनशन मिथिला राज्य आन्दोलन केर एक महत्त्वपूर्ण पड़ाओ रहल। हिनकर Rise for Mithila एहि आन्दोलनमे अपन जोर लगा रहल अछि। मिथिलांचल विकास सेना, दीनाभद्री संस्थान, मिथिला फाउंडेशन एवं अन्य समानधर्मी संस्था सभक कार्यकर्तागण अनवरत एहि आन्दोलन केर सफलताक लेल सक्रिय छथि। मिथिला वाहिनी (संस्थापक-सह- मुख्य संरक्षक श्री मिहिर झा महादेव) मिथिला-मैथिलीक उत्थान लेल बेस सक्रिय अछि। मिहिरजीक सम्बोधन एवं बात-चीतमे जय मातृभूमिक उद्घोष मुदित करैत अछि।
2019मे विद्यापति सेवा संस्थानक 47म विद्यापति स्मृतिपर्वमे सांसद श्री गोपालजी ठाकुर, सांसद श्री अशोक कुमार यादव एवं विधायक श्री संजय सरावगी मंचसँ अलग मिथिला राज्यक माँग उठओलनि। कहियो मान. सांसद हुकुमदेव नारायण यादवजी लोकसभामे मैथिलीमे शपथ नेने रहथि एहि बेर तऽ मिथिलांचल केर समस्त मान. विधायकगण विधानसभामे मैथिलीमे शपथ लेलनि। एहि अपूर्व घटनाकेँ जनाकांक्षाक प्रतिध्वनिए मानल जा सकैछ जेकर मूलमे मिथिला-मैथिली आन्दोलने थिक। रेलवे केर उद्घोषणा, दूरदर्शन-आकाशवाणीपर कार्यक्रम, दूरसंचार विभाग द्वारा मोबाइलपर मैथिलीमे पूर्व ध्वन्यंकित आवाज आदि एहि आन्दोलन केर सफलते थिक। अखन तऽ बहुत दूर जएबाक अछि।
ई गर्वक विषय रहल जे 22 दिसम्बर 2003केँ लोकसभा आ 23 दिसम्बर 2003केँ राज्यसभासँ मैथिलीकेँ भारतीय संविधानक अष्टम अनुसूचीमे स्थान भेटल। डाॅ. सी पी ठाकुर, डाॅ. वैद्यनाथ चौधरी वैजू एवं अन्य प्रतिनिधि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयीकेँ आभार प्रकट करबाक लेल गेल छलाह। वार्ताक क्रममे अटलजी कहलनि जे एकरा मात्र अपने संग सीमित नहि राखब, आर विस्तार देब। एहिसँ अनुप्राणित वैजूजी अन्तरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन शुरू कएलनि। प्रतिवर्ष 22-23 दिसम्बरकेँ मैथिली अधिकार दिवस रूपमे देशक विभिन्न क्षेत्रमे एकर गरिमामय आयोजन होइत अछि। 2021 केर आयोजन अयोध्याधाममे 22-23 दिसम्बरकेँ भेल छल। मैथिल परिधान धोती-कुरता आ मिथिला पेंटिंगयुक्त पाग-डोपटामे सजल-धजल पुरुषवर्ग आ मिथिला पेंटिंगसँ सुशोभित साड़ीमे सजल मैथिलानी सभक जुलूस जखन जानकीजी केर जयनाद करैत अयोध्याक बड़ा भक्तमाल आश्रमसँ श्रीराम जन्मभूमि धरि चलल तखन जेना अवध केर सड़क सियाराममय भऽ गेल हो। अपूर्व दृश्य छल ओ! बाट चलैत बटोही सभकेँ चकबिदोर लागि रहल छल। जानकीक नैहरसँ आएल मैथिल हुनक सासुर अवधमे हुनकर जयघोष कऽ रहल छल। अयोध्याक किछु भावुक महन्थ सभक आँखि ई अनुपम दृश्य देखि नोरा गेल रहए। समारोहमे बजैत काल सेहो किछु गोटे भावुक भेल छलाह। एहि सम्मेलनमे बहुत गोटेकेँ विभिन्न क्षेत्रमे उत्कृष्ट अवदानक लेल मिथिला रत्न केर सम्मानोपाधिसँ अलंकृत कएल गेल छल।
विद्यापति सेवा संस्थानक एहि बेर 2022क आयोजन तऽ सरिपहुँ समस्त कीर्त्तिमान ध्वस्त करैत फीनिक्स (एरिजोना, अमरीका)मे प्रस्तावित छल। कोरोनाक  पुनर्प्रसार भेलाक करणेँ ई आयोजन श्रीबालाजी तिरुपतिमे सम्पन्न भेल। सम्प्रति डाॅ. महेन्द्र नारायण राम एकर अध्यक्ष आ डाॅ. वैद्यनाथ चौधरी वैजू महासचिव छथि। निश्चित रूपसँ मैथिलीकेँ अष्टम अनुसूचीमे स्थान भेटब एहि आन्दोलन केर सफलता थिक मुदा ई एकटा पड़ाओ मात्र अछि। अखन यात्रा समाप्त कहाँ भेल अछि अखन तऽ कोसक कोस धाँगबाक अछि। असली सफलता मिथिला राज्यक स्थापनासँ होएत। एहि लेल संघर्ष जारी अछि।
21 अगस्त 2022केँ मिथिला स्टुडेंट यूनियन आ समानधर्मी लोक सभक सहयोगसँ मिथिला राज्यक लेल दिल्लीक जंतर-मंतरपर अभूतपूर्व, दर्शनीय आ प्रभावकारी धरना-प्रदर्शन आयोजित भेल। दिल्लीमे जेना पीयर रंगक जनसमुद्र आबि गेल हो। हम बिहारी नहि हम मैथिल छी, हमरा चाही मिथिला राज्य आदि नारा सभक जयघोषसँ दिल्ली गुँजायमान भेल रहए।
मिथिला-मैथिलीक लेल पुनर्जागरणक निमित्त अनेक संस्था सभक निर्माण भेल जे मिथिलावाद केर अग्रदूत बनल। 1910 ई.मे मिथिलेश रमेश्वर सिंह द्वारा स्थापित मैथिल महासभाक बैसारमे 1919मे मैथिली साहित्य परिषद्/मिथिला भाषा परिषद् केर स्थापना भेल छल।
1927 ई.मे बाबा विद्यापतिक नामपर आम मैथिलमे जागृतिक प्रचार-प्रसार लेल विद्यापति स्मृतिपर्व केर विचार आएल आ आयोजन शुरू भेल। 1935 ई.मे विद्यापति संबंधी लेख प्रतियोगिताक सूचना आ ओहिमे उमेश मिश्रजीकेँ प्रथम पुरस्कार रूपमे 100 टाका देल जएबाक सूचना पं. चन्द्रनाथ मिश्र अमरजी भारती (पृष्ठ 34)क आधारपर दैत छथि (मैथिली आन्दोलन : एक सर्वेक्षण, 1962, पृष्ठ 434)। कतहु विद्यापति जयन्ती कतहु विद्यापति स्मृतिपर्व रूपमे शुरू भेल ई समारोह मैथिलकेँ एक सूत्रमे जोड़बाक लेल अत्यन्त महत्त्वपूर्ण आयोजन बनल। दरभंगामे स्थापित विद्यापति गोष्ठीक सत्प्रयाससँ ई जोर पकड़ि लेलक। आब मिथिलाक ई महोत्सव विशाल वटवृक्ष बनि मिथिला-मैथिलीकेँ प्राणवायु दऽ रहल अछि। मिथिलामे तऽ ई गामेगामक उत्सव बनि गेल अछि। मिथिलांचलक बाहर सेहो भारतवर्षक प्रायः प्रत्येक पैघ शहरमे ई हर्षोल्लास आ समारोहपूर्वक मनाओल जाइत अछि। एहि आयोजनकेँ शुरू करबामे आ. पं. बलदेव मिश्र आओर नरेन्द्र नाथ दासक प्रयास महत्त्वपूर्ण छल। पं. काञ्चीनाथ झा किरणक सत्प्रयाससँ सोतिपुरामे गामेगाम विद्यापति गोष्ठी संगठित भेल जे प्रतिमास धवल त्रयोदशीकेँ विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करैत छल।
मिथिला-मैथिलीक लेल रचनाकार सभमे अनुपम मात्सर्य छल। ओ सभ लोककेँ जागरूक करबा लेल साइकिलपर दरी लादि यात्रा करैत छलाह आ विभिन्न ठाम दरी-जाजिम बिछा बैसार करैत जनमानसमे मिथिला-मैथिलीक लेल जागृतिक भाव जगबैत छलाह। एहन अभियानीमे किरणजी, मधुपजी, मणिपद्मजी, अमरजी, सीताराम झाजी, आरसी बाबू आदि प्रमुख छलाह। मिथिला-मैथिलीपर कतेक गीत रचल गेल। एहि आन्दोलनमे मैथिल दधीचि भोला लाल दास, बाबू भुवनेश्वर सिंह भुवन, प्रो. रमानाथ झा, प्रो. कृष्णकान्त मिश्र, बाबू लक्ष्मीपति सिंह, प्रो. प्रबोध नारायण सिंह, डाॅ. लक्ष्मण झा, राघवाचार्यजी, पं. भोलानाथ मिश्र, पं. देवनारायण झा, कमलेश झाजी, पीताम्बर पाठकजी, मिथिलेन्दुजी, अमरनाथ चौधरी ‘दीपक’जी, रमाकान्त मिश्रजी, सुधाकान्त मिश्रजी, धीरजी, राजनन्दन लाल दासजी, विजय चन्द्र झाजी, राकेश कुमार झाजी, रंगनाथ ठाकुरजी, अशोक झाजी आदि अभियानी सभक अवदान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण रहल अछि। डाॅ. वैद्यनाथ चौधरी वैजू आ डाॅ. धनाकर ठाकुर केर अभियानी स्वरूप हुनका सभकेँ जीवित किंवदन्ती पुरुष रूपमे परिचिति दैत अछि।
1956मे वैदेही समितिक तत्त्वावधानमे प्रथम अखिल भारतीय मैथिली लेखक सम्मेलन आयोजित भेल छल। म.म. उमेश मिश्रक सत्प्रयाससँ मैथिलीकेँ PEN आ प्राच्य विद्या महासम्मेलनमे महत्त्वपूर्ण स्थान भेटल।
सहस्राधिक छोट-पैघ मिथिला जागरण यात्रा सभक अवदान मिथिला-मैथिली आन्दोलनमे सेहो अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अछि। डाॅ. धनाकर ठाकुर केर शताधिक मिथिला जागरण यात्रा प्रसिद्ध अछि। ग्रेटर मिथिला एशोसियेशन केर किसलय कृष्णजी आ पं. धर्मेन्द्र नाथ मिश्र 16 जुलाई 2021केँ मिथिला जागरण यात्रा शुरू कएलनि। सर्वश्री एन मंडल, दक्षिणेश्वर राय, अर्जुन प्रसाद, विमलजी मिश्रा, रामकुमार सिंह आदि उत्साही सभ ग्रेटर मिथिला एशोसियेशनक बैनर तऽर विभिन्न सार्थक यात्रा कएलनि। एहिना श्री अरविंद कुमार झा, सचिव, अखिल भारतीय मिथिला पार्टी जनतब दैत छथि जे 31 अक्टूबरसँ 6 नवम्बर 2021 धरि मिथिला मंथन यात्रा तीन रथसँ संपन्न भेल। प्रथम रथ बलिराजगढ़सँ, दोसर सीतामढ़ीसँ आ तेसर वनगाँवसँ चलल आ विभिन्न क्षेत्रमे जन जागरण करैत सिमरिया धाम पहुँचल। एहि पार्टीक रत्नेश्वर झाजी सेहो मिथिला राज्यक लेल विभिन्न यात्रा कएलनि। चेतना आ जागृति लेल सचेष्ट रहैत छथि। मिथिला राज्य निर्माण सेनाक श्याम सुन्दर झाजी सेहो विभिन्न रथयात्रा कएलनि।
नेपालमे सेहो मिथिला-मैथिलीक लेल कम मात्सर्य नहि अछि। एहि दिशामे नेपालक अभियानी सभक जोश कनियो कम नहि अछि। जखन नेपालमे ‘सौंसे मिथिला एके टोल मैथिली जकर माएक बोल’ नारा बुलंद होइत अछि तखन मोन प्रमुदित होइत अछि। 2 दिसम्बर 1815केँ नेपाल आ ईस्ट इंडिया कम्पनीक मध्य सुगौली सन्धिपर हस्ताक्षर भेल छल। ई आश्चर्यजनक अछि जे तत्कालीन नेपाल नरेश युद्ध विक्रम शाह केर एहिपर हस्ताक्षर नहि अछि। सन्धिपर राजगुरु गजराज मिश्रजी (सहायक चन्द्र शेखर उपाध्यायजी) हस्ताक्षर कएलनि। ईस्ट इंडिया कम्पनी दिशिसँ लेफ्टिनेंट कर्नल पैरिस ब्रेडशाॅक हस्ताक्षर भेल छल। नेपाल नरेश द्वारा एकर अनुमोदन नहि भेल तथापि 4 मार्च 1816केँ एहि सन्धिकेँ राजा द्वारा अनुमोदित मानि लेल गेल। एहिमे मिथिलाक उत्तरी क्षेत्र जनकपुर, धनुषा, वीरगंज आ विराटनगर क्षेत्र नेपालकेँ देल गेल आ नेपालक गढ़वाल, कुमाउँ, सिक्किम आ दार्जिलिंग ब्रिटिश भारतवर्षकेँ देल गेल। ई सन्धि मिथिलाकेँ दू भागमे खंडित कएलक। डाॅ. लक्ष्मण झा एहि सुगौली सन्धि केर भारी विरोध करैत छलाह। भारत-नेपाल सीमापर ठाढ़ विभाजनकारी स्तम्भ सभकेँ ध्वस्त कएने छलाह। मिथिला-मैथिलीक एहि किंवदन्तीपुरुषकेँ कमसँ कम मिथिला राज्य बनाकेँ तर्पण करब वर्तमान पीढ़ीक दायित्व अछि। सीमापरक स्तम्भ एक दिन स्थायी रूपसँ हटि जाय आ दुनू कातक मिथिला एक हुअए ई मैथिल मनीषी सभक स्वप्न अछि। आइ भले नेपालक एक पूर्व प्रधानमंत्री राजनीतिक कारणेँ चितवन लऽग दोसर मादी अयोध्या होएबाक प्रलाप कएने होथि, दुनू देशक आमजन सिया सुकुमारीक पति रूपमे भारतवर्षक सरयू नदीक कात अवस्थित अयोध्याधामक दशरथनंदन श्रीरामेकेँ जनैत अछि। दुनू देशमे बेटी-रोटीक ई शाश्वत संबंध सम्पूर्ण मिथिलाकेँ उद्वेलित करैत अछि। आब अखंड मिथिलाक स्वप्न सेहो देखल जा रहल अछि। मैथिली एशोसियेशन, नेपाल; मैथिली विकास कोष, जनकपुरधाम; मातृभाषा संघर्ष समिति, विराटनगर; मैथिली साहित्यकार सभा, जनकपुर धाम; मैथिली सेवा समिति, विराटनगर; मैथिली जिन्दाबाद, विराटनगर; विराटगढ़ परोपकार समाज, मैथिल ब्राह्मण महासभा युवा समिति, मैथिली चलचित्र कर्मी संघ, थारू आ राजवंशी समाज सभक जोश दर्शनीय रहैत अछि। नेपालक प्रांत संख्या 2 केर नाम मधेश प्रांत करब सेहो सर्व स्वीकार्य नहि भेल आ एकर नामकरण मिथिला प्रांत करबाक अभियान सेहो चलि रहल अछि।
यथार्थमे मिथिला-मैथिलीक उन्नति लेल एतेक संस्था आ लोक सक्रिय छथि जे सभक अवदानक उल्लेख करब कठिन अछि। नेटपर सक्रिय संस्था सभक संख्या गानब धरि संभव नहि। संभव जे एहि आलेखमे अचर्चित संस्था/ व्यक्तिक अवदान बहुत पैघ आ महत्त्वपूर्ण हो। एहन संस्था/व्यक्तिसँ क्षमायाचना करैत आन्दोलनमे लागल समस्त सक्रिय सदस्य सभकेँ शुभकामना दैत छी जे सभक स्वप्न शीघ्रे साकार हो।
एहि ठाम इहो कहब उचित जे जाबत ई आन्दोलन जनान्दोलन केर रूप नहि धरत ताबत परिणाम आकाश कुसुमे रहत। इहो महत्त्वपूर्ण अछि जे एहिमे अंगिका-बज्जिका-सुरजापुरी-पचपनिया-उर्दू आदि भाषाक साहित्यकार सभकेँ वृहत्तर मैथिल क्षेत्रमे आनल जएबाक चाही। एहन किछु गोटेक भ्रम केर स्थायी निवारण करब परमावश्यक अछि जे मैथिलीकेँ ओ सब रकीब नहि तथ्यात्मक रूपसँ मातृसंस्था मानथि। एहि लेल शुद्ध अन्तर्मनसँ प्रयास होएबाक चाही। सभ भाषा विकासक पात्रता रखैत अछि मुदा एक भाषाक बलि चढ़ा दोसर केर उत्थान कोनो विवेकशील मानव नहि चाहत। मातृहन्ता भगवान् परशुरामक गर्व मातृसेवी श्रीरामक समक्षे खंडित होइत अछि। अखिल भारतीय अंग-अंगिका विकास मंचक राष्ट्रीय महासचिव श्री कुन्दन अमिताभ केर प्रधानमंत्रीसँ माँग जे नेपालक भाषा मैथिली आ नेपालीकेँ संविधानक अष्टम अनुसूचीसँ निष्कासित कऽ अंगिकाकेँ अष्टम अनुसूचीमे शामिल कएल जाय, आश्चर्यजनक आ दुखद अछि। अपन माएक मानमे मतामहीक मानमर्दन करब सर्वथा अनुचित! एहि दिशामे तत्काल सार्थक प्रयास केर आवश्यकता छैक।
आब किछु कटु सत्यसँ साक्षात्कार करायब। मैथिलीक मंचपर जोरजोरसँ चिचिया आ पाग-डोपटासँ सम्मानित भेलाक बाद जखन किछु मातवर लोक उतरैत छथि तखन अपन मैथिल अंगरक्षक, वाहनचालक वा लगुआ-भगुआकेँ हिन्दीमे आदेश दैत छथि- गाड़ी लाओ। ओ जखन घर अबैत छथि तखन नाति-पौत्रकेँ हिन्दीमे मैथिलीक कथा सुनबैत छथि। बहुत गोटे आ संस्था मात्र मैथिलीक समर्थनमे फोटो घिचा फेसबुक वा अन्य सामाजिक माध्यमपर दैत अपन कर्त्तव्यक इतिश्री मानि लैत छथि। जमीनपर परिश्रम करएसँ कनछी काटैत छथि। एहि आभासी दुनियाँसँ बाहर आबए पड़त। अपन घाम चुआबए पड़त। ई प्रवृत्ति जे खुदीराम-भगतसिंह-आजाद-अशफाक आदि अग्निपुत्र दोसर घरमे जन्म लेथि आ देशपर कुर्बान होथि, अत्यन्त खतरनाक अछि। हमर ई अभिप्राय नहि अछि जे सभ केओ आन्दोलनमे कुदि हिंसक अभियान करी, ई ने उचित अछि आ ने संभव। मुदा हमर ई अभिप्राय तऽ अवश्य अछि जे सार्वजनिक जीवन वा कार्यालयमे आवश्यकतानुसार भले दोसरो भाषामे बात करी मुदा अपन घरमे, समाजमे वा कोनो मैथिल संग कोनो परिस्थितिमे कतहु मैथिली छोड़ि हिन्दी-अंग्रेजीमे गप्प नहि करी। एहि छोट निश्चय केर ताकतसँ बड़का साम्राज्य झुकाओल जा सकैत अछि। मात्र यैह निश्चय एहन पीढ़ी अवश्य तैयार करत जे अपन अधिकार लऽकेँ रहत। देखाउँस करबाक कोनो प्रयोजन नहि। जे काज करैत छी ओहिमे मैथिलीक सर्वाधिक उपयोग करी। पंचायत अन्तर्गत पत्राचार, सूचनादि काज मुखियाजी/पंचायत सचिव मैथिलीमे करथि तऽ एहिमे कोन व्यवधान? विद्यालय वा आन संस्था सेहो अपन पत्र व्यवहार मैथिलीमे कऽ सकैत अछि। श्री दीप नारायण 18 मई 2017सँ मधुबनीक बेनीपट्टी प्रखण्ड अंतर्गत कपसिया पंचायतक नव प्रा. विद्यालय लोहनाटोलमे प्र. प्रधानाध्यापक रूपमे कार्यरत छथि। ओ बिनु कोनो आत्मप्रचार वा ताम-झामकेँ अपन विद्यालयक सभटा पत्राचार, प्रत्येक सूचना, समस्त पंजी सभक पृष्ठांकन प्रमाणपत्र सहित अन्य सभटा काज अनिवार्य रूपसँ मैथिलीएमे करैत छथि। प्रत्येक दिन विद्यालयक चेतना सत्रमे बाबा विद्यापति रचित जय जय भैरवि असुर भयाओनि केर प्रार्थना होइत अछि आ भारतीय संविधानक प्रस्तावना केर मैथिलीमे वाचन कएल जाइत अछि। मैथिलीक प्रति हिनक मात्सर्यसँ प्रभावित भऽ सहकर्मी सभमे मातृभाषाक लेल अनुराग उत्पन्न भेल। हिनक सहकर्मी श्रीमती ज्योति एवं अनेक शिक्षक/ शिक्षकेतर मित्र  मातृभाषा मैथिलीमे स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कएलनि। श्री दीप नारायण आ श्रीमती ज्योति मैथिली माध्यमसँ बच्चा सभकेँ पढ़ा रहल छथि। ई देखल जा रहल अछि जे नेना सभक बीच मातृभाषा मैथिलीमे पढ़ौनी एवं वार्तालाप सहज बोधगम्य एवं प्रभावी भेल अछि। वास्तविक मैथिली अभियानी एहने लोक छथि जे चुपचाप अपन काजमे लागल रहैत छथि। पाठशालामे मैथिली अभियान केर बैनर संग धरना-प्रदर्शन कएनिहार शिक्षक सभकेँ श्री दीप नारायणक एहि मौन मैथिली सेवासँ प्रेरणा लेबाक चाही। जँ मिथिला क्षेत्रक सब शिक्षकगण एकरा अपन-अपन विद्यालयमे लागू करैत छथि तखन कार्यसिद्धि कतेक सुगम भऽ जाओत ! एहि लेल कोनो अनुमतिक आवश्यकता नहि छैक मात्र दीप नारायण सन अपन मातृभाषाक लेल नेह, निष्ठा आ निष्काम सेवाभाव चाही। इहो आह्लादकारी बात अछि जे दीप नारायणजी ने ब्राह्मण छथि ने कायस्थ छथि। मैथिलीक लेल हुनकर ई स्वतःस्फूर्त मौन अभियान एवं अन्य ब्राह्मण-कायस्थेतर मनीषी सभक मैथिलीक लेल कएल गेल अवदानसँ ई स्पष्ट होइत अछि जे मैथिली मात्र ब्राह्मण आ कायस्थक भाषा नहि थिक। स्वार्थवश लगाओल गेल एहन आरोप निराधार अछि। मैथिली लेल श्री हुकुमदेव नारायण यादवजीक मात्सर्य किनकासँ कम अछि? गीदड़गंज जमैलाक पूर्व मुखियाजी बदरूद्दीन साहेब सन सुन्दर मैथिली के बाजि सकैत छल? हरिणाक पूर्व मुखियाजी आ वरीय अधिवक्ता श्री अतिकुर रहमानजीक सुन्दर मैथिली संवादक परतर के कऽ सकैत छथि? जाति-धर्मसँ परे मिथिलामे रहनिहार समस्त जन मैथिल छथि। आब जखन सबजना मैथिल उनटि गेल अछि तखन बिनु अपन अधिकार नेने मानत नहि। मिथिला राज्यक सपना साकार भऽकेँ रहत! अखंड मिथिला सेहो बहुत दूर नहि अछि।
[अर्पण, स्वर्ण जयन्ती विशेषांक, विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा, नवम्बर 2022]

2 Comments

  1. मैथिली पत्रिका समूह (व्हाट्सएप)पर अनुप्रासक पत्रिका द’ आई देखल।
    तही क्रम मे उक्त आलेख पढ़लहुँ। नीक लागल। प्रेरित केलक।

    ADITYANATH SINGH THAKUR

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